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 कोई ईर्ष्या करें तो करने दो हमारा क्या बिगड़ेगा

कोई ईर्ष्या करें तो करने दो हमारा क्या बिगड़ेगा

ईर्ष्या करने वालों से विचलित होने के बजाय हमें प्रसन्न और संयमित रहना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति वही देता है जो उसके भीतर होता है।

 वो पान की दुकान वो बरगद की छांव

वो पान की दुकान वो बरगद की छांव

यह कविता प्रेम की उन यादों को समेटे है, जहाँ साधारण जगहें भी खास बन जाती हैं। बारिश, हवाएँ, गलियाँ और छोटी-छोटी शरारतें दो दिलों की नज़दीकी बयाँ करती हैं।

 लोग क्या सोचेंगे

लोग क्या सोचेंगे

“लोग क्या सोचेंगे” की चिंता व्यक्ति की शक्ति और आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है। समाज की राय के डर से हम अपने लक्ष्य से

 लोग क्या सोचेंगे

लोग क्या सोचेंगे

“लोग क्या सोचेंगे” की चिंता व्यक्ति की शक्ति और आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है। समाज की राय के डर से हम अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं।

 दो प्रेमियों को मिलते देखा है

दो प्रेमियों को मिलते देखा है

कविता में संध्या के समय दो प्रेमियों के मिलन का दृश्य है, जहाँ नज़रें, मुस्कान, प्रकृति और मौन संवाद प्रेम की गहराई को दर्शाते हैं और वे धीरे विलीन हो जाते हैं।

 माँ न हो तो जग अधूरा

माँ न हो तो जग अधूरा

यह कविता मां पर आधारित है। जो यह बतलाती है कि एक मां अपने बेटे को इतना प्यार करती है।



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