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Title:
Vitrishna
Description:
इन कहानी में जिन विभिन्न कथा-स्थितियों को लेखिका ने रेखांकित किया है, उनमें मानव-स्वभाव और उसके अंतर्विरोध की अनेकानेक पर्तें अनायास ही खुलने लगती हैं । मृदुलाजी चीजों, स्थितियों और परिवेश के अमूर्तन में विश्वास नहीं करतीं । कहीं दूर टिमटिमाते स्मृति-बिंबों के सहारे, तो कहीं ऐतिहासिक कुहासों को चीरते हुए वे लगातार प्रकाश-कणों की तलाश करती हैं ।