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Title:
Priyakant
Description:
1970 के बाद के भारतीय समाज में दो बातें ऐसी घटित हुई हैं, जिन्होंने विकास के साथ-साथ मूल्यों को पहले की अपेक्षा और भी तेज़ी से क्षरित किया है। पहली बात है हमारी राजनीति का अपराधीकरण। ऐसी नहीं कि आपराधिक मनोवृत्ति के लोग उससे पहले राजनीति में नहीं थे, लेकिन आपातकाल के दौर में यह अपराधीकरण इतनी तेज़ी से हुआ कि उससे कोई भी राजनीतिक दल अछूता नहीं रहा। उसके दुष्परिणाम भारतीय समाज अभी भी भुगत रहा है और अभी भी राजनीति आपराधिक सोच से विलग नहीं हुई है। दूसरी बात जो हमारे समाज ने देखी है, वह है धर्मगुरुओं और धर्माचार्यों का मूल्यहीन एवं दिशाहीन उदय। साठ और सत्तर के दशक में और बाद के समय में एक अंतर तो स्पष्ट रूप से लक्षित किया जा सकता है। बाद के समय में सभी छद्मावरण उतार दिए गए और धर्म के नाम पर खुला नंगा नाच सामने आया।