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Title:
Yahan Se Kahin Bhi
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Description:
यह एक सफ़रनामा है । मुसाफ़िर को भला क्या चाहिए ! यही न कि रात के अँधेरे को चीरती-भागती रेलगाड़ी में उसकी सुख-निंदिया न टूटे; वह सही-सलामत अपनी मंजिल तक पहुँच जाए । लेकिन अगर इंजन फकफकाता और सीटी पर सीटी मारता-पटरी से हिले ही नहीं और इससे बेख़बर मुसाफ़िर खुद को उसी प्लेटफ़ार्म पर अटका पाए जहाँ वह गाड़ी में सवार हुआ था, तो भला, इसके अलावा वह और क्या कह सकेगा कि अपने राम का सफ़र 'यहाँ से कहीं नहीं' था । 'या शायद वह उसे 'यहाँ से कहीं भी' समझ धीरज धरे ।