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Title:
Mahadevi Verma Ki Kavita Strivadi Drishti Se Adhyayan
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Description:
महादेवी वर्मा की कविताओं को पढ़ना स्त्री-मन की भीतरी अमूर्त परतों को धीरे-धीरे एक सघन संकोच के साथ आकार लेते देखना है. वे शब्दों में गुंथी अंतस् की अभिव्यक्तियां नहीं, तूलिका की धूसर तरलता के साथ सतह पर फैलती चलती फैसलाकुन व्याकुलताएं हैं. व्याकुलताएं जिनमें सामाजिक मानदंडों, नैतिक वर्जनाओं और पारिवारिक प्रतिबद्धताओं से परे अपने को निखूट इंसान के रूप में जानने की आकांक्षाएं हैं.