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Title:
Dravid Parivar Ki Bhasha Hindi
Description:
पुस्तक का नाम देख कर पाठकों को आश्चर्य हो सकता है। गत दो सौ वर्षों में भाषा शास्त्री हिन्दी को आर्य परिवार की भाषा बताते रहे हैं। इस दीर्घ अवधि में बद्धमूल हुई धारणा से भिन्न स्थापना देख कर आश्चर्य होना स्वाभाविक है। पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण यह है कि तथ्यों के लिए आग्रह किया जाय, बद्धमूल धारणाओं के लिए नहीं। इस दृष्टिकोण को अपना कर दो सौ पृष्ठों की यह पुस्तिका पढ़ी जाएगी तो दो सौ वर्षों की बद्धमूल धारणा निर्मूल हो जाएगी।