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Title:
Yatnaghar
Description:
उपन्यास यातनाघर में विष्णु नारायण अपने आला अफ़सरों की तानाशाही और मनमानी झेलता-झेलता इतना बेबस हो जाता है कि उसे लगने लगता है कि वह इंसान नहीं 'कोल्हू का बैल' बन गया है।