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Title:
Apaatkaal Mein Cinema
Description:
राजनीति-समाज-साहित्य-सिनेमा एक दूसरे से अलग नहीं हैं। सिनेमा के विषय भी समाज से ही आते हैं। यही वजह है कि हमारा सिनेमा जितना रोमांटिक भावनाओं को व्यक्त करने वाला रहा सामाजिक और राजनीतिक तौर पर भी उतना ही मुखर रहा है। हां, ये अलग बात है कि सिनेमा की मुखरता बहुत से लोगों को रास आती भी है और नहीं भी आती है। भारतीय राजनीति में आपातकाल एक ऐसा दौर रहा है जब अभिव्यक्ति के सारे माध्यमों को कुचल दिया गया था। इससे सिनेमा भी प्रभावित हुआ। तब फिल्म इंडस्ट्री नहीं थी, उसे फिल्मनगरी कहा जाता था। उस दौर में कई फिल्में, कई गाने, कई कलाकार और अनेक फिल्मों के सीन प्रभावित हुए। इसकी लंबी दास्तां है। यहां तक कि आज की तरह तब भी फिल्मनगरी के कलाकार दो ध्रुवों में बंटे थे। एक पक्ष सत्ता समर्थक था तो दूसरा पक्ष सत्ता विरोधी। इस पुस्तक में आपातकाल के दौरान की फिल्मों पर आलेख संकलित हैं। जाहिर है कि आपातकाल के पचास बरस बीत चुके हैं तो इन फिल्मों के भी पचास शानदार साल बीते हैं। आज से पचास साल पहले इन फिल्मों का कैसा प्रभाव था और आज की तारीख में भी इन फिल्मों का कैसा प्रभाव बना हुआ है- इसे बताने का प्रयास है।