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Title:
Agnigatha Ke Nayak Shaheed Ramnarayan Azad
Description:
"सरफ़रोशी दिल में है, तो और सर पैदा करो। नौजवानों, हिंद में फिर से गदर पैदा करो।।" पंडित रामनारायण आज़ाद (02.09.1897-11.08.1947) भारत के महान क्रांतिकारी थे, जिनका स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान था। वह मुख्य रूप से फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) से जुड़े थे, जहाँ उन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियों का नेतृत्व करते हुए क्रांति की ज्वाला भड़काई। उनका घर क्रांतिकारियों के लिए एक प्रसिद्ध अड्डा था। ब्रिटिश खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, आज़ाद क्रांतिकारियों को बम, पिस्तौल और गोला-बारूद की सप्लाई करते थे। वह राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आज़ाद और शचींद्रनाथ सान्याल के करीबी सहयोगी थे। कई मौकों पर, चंद्रशेखर आज़ाद उनके घर पर रुके थे। ब्रिटिश रिपोर्ट के अनुसार अनंत राम, जगदीश, बैद्यनाथ, चंद्रशेखर, संत कुमार पाण्डेय (फतेहपुर) आदि लोगों ने एक संगठन बनाया था – 'रामनारायण आज़ाद रिवॉल्यूशन ग्रुप', जिसमें लगभग 200 से अधिक लोग जुड़े थे। क्रांति के लिए धन जुटाने हेतु आजाद जी ने अपनी 29 दुकानें और नौ मकान बेच दिए थे।। आंदोलन को सुचारु रूप से चलाने के लिए, उन्होंने गंगा नदी के किनारे विश्रांत घाट पर ठिकाना बनाया, जो क्रांतिकारियों के छिपने और नदी पार करने का महत्वपूर्ण स्थान था। आज़ादी के मतवाले पंडित आज़ाद को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 1912 से 1942 तक कई बार कठोर कारावास हुआ। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की आज़ादी से ठीक चार दिन पहले, यानी 11 अगस्त 1947 को पंडित जी को गोली मारकर शहीद कर दिया गया था।