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Title:
Manjati Dhulati Pateeli
Tags:
Kavita
Poetry
Stri Vimarsh
Description:
ऐसे समय में जब परिवार टूट रहे हैं और स्त्री अपनी स्वाधीनता के नाम पर देह की स्वाधीनता को ही चरम स्वाधीनता मान बैठी है, रघुवंशीजी की कविताएँ उस विमर्श को नकारती हैं।