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Title:
Bheed Satar Mein Chalne Lagi Hai (भीड़ सतर में चलने लगी है)
Tags:
Poetry
Kavita
Description:
भीड़ सतर में चलने लगी है’ कविता-पुस्तक में रमणिका गुप्ता की ‘बात’ बोलती है, सीधे-सीधे बोलती है और वही ‘बात’, ‘भेद’ भी खोलती है, सब कुछ बताती है, सब कुछ खोलकर रख देती है। षड्यंत्रा, चालाकी और हैवानियत के विरुद्ध मासूमियत, सह-अनुभूति और संघर्ष के पथरीले रास्तों पर चलती हैं ये कविताएं। ‘भीड़ सतर में चलने लगी है’ की कविताएं पूरी तरह श्रमिक वर्ग से जुड़ी कविताएं हैं।